हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब पंचायत (शामलात) भूमि पर वर्ष 2004 से पहले बने 500 वर्ग गज तक के मकानों को नियमित (Regularize) करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए सरकार ने ‘समाधान पोर्टल’ लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से पात्र परिवारों को कानूनी मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने ग्रामीण विकास कार्यों की निगरानी के लिए एचआरपीएमएस (Haryana Rural Project Management System – HRPMS) पोर्टल भी शुरू किया है। इन दोनों डिजिटल पोर्टलों का शुभारंभ हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने पंचायत भवन, चंडीगढ़ में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान किया।
पंचायत भूमि पर बने 500 गज तक के मकानों को मिलेगी कानूनी मान्यता
सरकार द्वारा शुरू किए गए समाधान पोर्टल का मुख्य उद्देश्य पंचायत (शामलात) भूमि पर वर्ष 2004 से पहले बने 500 वर्ग गज तक के मकानों को नियमित करना है। इससे लंबे समय से ऐसे मकानों में रह रहे पात्र ग्रामीण परिवारों को कानूनी मालिकाना हक मिल सकेगा और भविष्य में उन्हें संपत्ति संबंधी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इस पहल से हजारों ग्रामीण परिवारों को राहत मिलेगी और पंचायत भूमि से जुड़े मामलों के समाधान में भी तेजी आएगी।
HRPMS पोर्टल से होगी विकास कार्यों की ऑनलाइन निगरानी
हरियाणा सरकार ने ग्रामीण विकास कार्यों की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए Haryana Rural Project Management System (HRPMS) पोर्टल भी शुरू किया है।
इस पोर्टल के माध्यम से—
- विकास कार्यों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी।
- प्रत्येक परियोजना की चरणबद्ध प्रगति दर्ज की जाएगी।
- कार्यों की गुणवत्ता एवं समय सीमा पर नजर रखी जाएगी।
- विकास योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
समीक्षा बैठक में कई योजनाओं की हुई समीक्षा
पंचायत भवन, चंडीगढ़ में आयोजित बैठक में सभी जिला परिषद अध्यक्ष, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) तथा विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा की गई, जिनमें प्रमुख रूप से—
- अटल पुस्तकालय
- फिरनी निर्माण
- योग एवं व्यायामशाला
- इनडोर जिम
- ग्राम सचिवालय
- शिवधाम
- स्ट्रीट लाइट
- सड़क मरम्मत एवं नवीनीकरण
- मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना
- महिला चौपाल
- हरियाणा ग्रामीण विकास योजना
- महिला सांस्कृतिक केंद्र
- अमृत सरोवर
जैसी योजनाएं शामिल रहीं।
